मेहनती चींटी

मेहनती चींटी

बरसात के दिनों में एक छोटी चींटी रोज़ दाने इकट्ठा करती थी।

तितली का मज़ाक

पास ही एक तितली रहती थी जो हमेशा उसका मज़ाक उड़ाती थी —
“तुम इतनी मेहनत क्यों करती हो? ज़िंदगी का मज़ा लो!”

मुसीबत का समय

एक दिन तेज़ बारिश आई और तितली उड़ नहीं पाई।
वह भूखी और थकी हुई थी।

सच्ची मदद

चींटी ने बिना कुछ कहे उसे अपने दाने दे दिए।

तितली बोली — “तुम छोटी हो, लेकिन दिल बहुत बड़ा है।”
चींटी मुस्कराई — “अच्छाई कभी छोटी नहीं होती।”

सीख

उस दिन से तितली भी दूसरों की मदद करने लगी। 🌿

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