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टिल्लु और चारों दिशाएँ

Curiosity & Exploration 5-6 years 2-3 mins read By Ashwini Gokhe Art: Navika Marwah

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सुबह – सवेरे उठकर टिल्लु पहुंँचा छत पर,
आज टिल्लु ने था ठाना चारों दिशा का है पता लगाना
कहाँ है उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम का ठिकाना
छत पर पहुंँच कर घूम -घूम
टिल्लु सूरज को रहा ढुंँढ-ढुंँढ
नीले-नीले आसमान पर
लाल-लाल छवि देख
नज़र गई अटक
टिल्लु लाल छवि देख रहा एकटक
लाल छवि से निकला गोल -गोल लाल सूरज

टिल्लु उछला ये है पूरब, पीछे पश्चिम, दायें दक्षिण, बायें उत्तर
चारों दिशा का पता लगाकर
टिल्लु खु़शी मे रहा झूम- झूम
आज टिल्लु ने उगता सूरज देखा
सूरज को रंग बदलते देखा
पहले लाल, फिर नारंगी और फिर सफे़द होते देखा
जब तक सूरज की किरणे मद्धम थी
तब तक सूरज को अपलक देखा
फिर सूरज से नजर हटाकर
कुछ देर तन पर सूरज सेका
तन -मन को ऊर्जा से भरकर
टिल्लु ने सबको अपना अनुभव सुनाया घर लौटकर।

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